राजस्थान प्रशासनिक व्यवस्था: एक परिचय

राजस्थान भारत का सबसे बड़ा राज्य है और इसकी प्रशासनिक व्यवस्था भारतीय संविधान के अनुसार संचालित होती है। राजस्थान प्रशासनिक दृष्टि से 7 संभागों और वर्तमान में 41 जिलों में विभाजित है। प्रत्येक संभाग एक संभागीय आयुक्त के अधीन होता है और प्रत्येक जिला एक जिला कलेक्टर/जिला मजिस्ट्रेट के अधीन होता है। राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था तीन स्तरीय है - राज्य स्तर, जिला स्तर और तहसील स्तर।

महत्वपूर्ण तथ्य

राजस्थान की स्थापना: 30 मार्च 1949

संभागों की संख्या: 7 (पहले 10 हो गए थे, लेकिन 3 नए संभागों - सीकर, पाली, बांसवाड़ा को हाल ही में रद्द कर दिया गया है)

जिलों की संख्या: 41 (2024 तक। 2023 में 50 हो गए थे, लेकिन 9 नए जिलों को हाल ही में रद्द कर दिया गया है)

तहसीलों की संख्या: 426 (राजस्‍थान में अभी 232 उप-तहसीलें हैं।)

पंचायत समितियाँ: 365 (नवंबर 2025 में 85 नई पंचायत समितियों के गठन के बाद, इनकी कुल संख्या लगभग 450 हो गई है।)

ग्राम पंचायतें: 11,152 (नवीनतम परिवर्तनों के अनुसार, 3440 नई ग्राम पंचायतें बनाई गई हैं, जिससे कुल संख्या काफी बढ़ गई है।)

राजस्थान के संभाग और जिले

राजस्थान राज्य को बेहतर प्रशासन के लिए राज्य के संभागों और जिलों में बांटा गया है। राज्य में कुल 7 संभाग और 41 जिले (यह नवीन संस्‍करण से लिया गया है) हैं। प्रत्येक संभाग में कई जिले आते हैं, जिनका संचालन संभागीय आयुक्त के नेतृत्व में होता है। संभाग और जिलों की संरचना स्थानीय प्रशासन और विकास कार्यों की प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है। प्रतियोगी परीक्षाओं में इसके नाम और जिले याद रखना अक्सर पूछा जाता है।

संभागीय व्यवस्था

  • राजस्थान में 7 संभाग हैं
  • प्रत्येक संभाग में कई जिले शामिल हैं
  • संभागीय आयुक्त संभाग का प्रशासनिक प्रमुख होता है
  • संभागीय आयुक्त का मुख्यालय संभागीय मुख्यालय में होता है
  • संभागीय आयुक्त राजस्व और प्रशासनिक मामलों का प्रमुख होता है

जिला प्रशासन

  • राजस्थान में 50 जिले हैं
  • हाल ही में (दिसंबर 2024 / जनवरी 2025 में) 9 नए जिलों के गठन को रद्द कर दिया गया है। वर्तमान में, राजस्थान में कुल 41 जिले हैं।
  • जिला कलेक्टर जिले का प्रमुख प्रशासनिक अधिकारी होता है
  • जिला कलेक्टर राजस्व, प्रशासन और विकास के प्रमुख होते हैं
  • प्रत्येक जिला कई तहसीलों और पंचायत समितियों में बंटा होता है
  • जिला स्तर पर विभिन्न विभागों के अधिकारी कार्यरत होते हैं
संभाग मुख्यालय जिलों की संख्या स्थापना वर्ष महत्वपूर्ण जिले
जयपुर जयपुर 7 1949 जयपुर, दौसा, सीकर
जोधपुर जोधपुर 5 1949 जोधपुर, जैसलमेर, बाड़मेर
अजमेर अजमेर 4 1949 अजमेर, भीलवाड़ा, टोंक
उदयपुर उदयपुर 5 1949 उदयपुर, राजसमंद, डूंगरपुर
बीकानेर बीकानेर 4 1949 बीकानेर, चूरू, हनुमानगढ़
कोटा कोटा 4 1949 कोटा, बूंदी, बाराँ
भरतपुर भरतपुर 6 1982 भरतपुर, धौलपुर, करौली

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जिला प्रशासनिक संरचना

प्रत्येक जिले में जिला कलेक्टर/DM सबसे महत्वपूर्ण अधिकारी होते हैं। जिला प्रशासन के तहत विभिन्न विभाग जैसे स्वास्थ्य, शिक्षा, पुलिस और राजस्व कार्य आते हैं। जिलाधिकारी का मुख्य कार्य जिले में कानून और व्यवस्था बनाए रखना, विकास योजनाओं को लागू करना और सरकारी सेवाओं की निगरानी करना है। परीक्षा के लिए जिला प्रशासन के ढांचे और अधिकारियों के पदनाम याद रखना महत्वपूर्ण है।

जिला स्तर

  • जिला कलेक्टर/जिला मजिस्ट्रेट (DM)
  • अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (ADM)
  • जिला परिषद अध्यक्ष (Zila Pramukh)
  • मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO, Zila Parishad)
  • जिला शिक्षा अधिकारी (DEO)
  • जिला चिकित्सा अधिकारी (CMO)
  • जिला पुलिस अधीक्षक (SP)

उपखंड स्तर

  • अपर जिला मजिस्ट्रेट/उपखंड अधिकारी (SDM)
  • तहसीलदार
  • उपखंड पुलिस अधिकारी (DSP)
  • ब्लॉक विकास अधिकारी (BDO)
  • पंचायत समिति प्रधान

तहसील स्तर

  • तहसीलदार
  • नायब तहसीलदार
  • तहसील पुलिस थाना प्रभारी
  • कानूनगो

ग्राम स्तर

  • पटवारी (लेखपाल)
  • ग्राम सेवक
  • सरपंच
  • ग्राम पंचायत सचिव
  • पुलिस कांस्टेबल

जिला कलेक्टर के कार्य और शक्तियाँ

जिला कलेक्टर को जिले का मुख्य प्रशासनिक अधिकारी माना जाता है। इनके कार्यों में कानून व्यवस्था सुनिश्चित करना, चुनाव प्रक्रिया का संचालन, राजस्व संग्रह, आपदा प्रबंधन और विकास योजनाओं का क्रियान्वयन शामिल है। इनके पास जिले में निर्णय लेने और विभिन्न विभागों को निर्देश देने की अधिकारिता होती है। RPSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में इनकी जिम्मेदारियां अक्सर प्रश्नों में आती हैं।

राजस्व संबंधी कार्य

  • भू-राजस्व का संग्रहण और प्रबंधन
  • भूमि अभिलेखों का रखरखाव
  • चकबंदी और भूमि सुधार कार्यक्रम
  • कृषि ऋण और राहत कार्य
  • राजस्व अपीलों का निपटारा

प्रशासनिक कार्य

  • कानून और व्यवस्था बनाए रखना
  • चुनाव कराना
  • आपदा प्रबंधन
  • जनसंख्या नियंत्रण कार्यक्रम
  • विभिन्न योजनाओं का क्रियान्वयन

विकास संबंधी कार्य

  • जिला योजना समिति के अध्यक्ष
  • विकास योजनाओं का क्रियान्वयन
  • ग्रामीण विकास कार्यक्रम
  • सार्वजनिक निर्माण कार्य
  • सामाजिक कल्याण योजनाएं

न्यायिक कार्य

  • मजिस्ट्रेट के रूप में कार्य
  • कारावासों का निरीक्षण
  • अपराध नियंत्रण
  • शांति और सद्भावना बनाए रखना
  • विभिन्न अधिनियमों का क्रियान्वयन

राजस्थान के प्रमुख प्रशासनिक पद

राजस्थान प्रशासन में कई महत्वपूर्ण पद हैं, जो राज्य के सुचारू संचालन और विकास कार्यों के लिए आवश्यक हैं। जिले का मुख्य प्रशासनिक अधिकारी कलेक्टर (DM) होता है, जो कानून-व्यवस्था बनाए रखने, विकास योजनाओं का क्रियान्वयन और सरकारी सेवाओं की निगरानी करता है। SDM या उपजिलाधिकारी तहसील स्तर पर प्रशासनिक कार्यों को देखता है और कलेक्टर के आदेशों को लागू करता है। तहसीलदार मुख्य रूप से राजस्व कार्य और भूमि रिकॉर्ड का प्रबंधन करता है, जबकि पटवारी गांव स्तर पर भूमि संबंधित दस्तावेज और स्थानीय प्रशासन से जुड़ी जानकारी संभालता है। प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे RPSC, VDO, Patwari में इन पदों और उनकी जिम्मेदारियों से जुड़े प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं। इसलिए इन पदों का स्पष्ट ज्ञान और कार्य-प्रणाली समझना परीक्षा में सफलता के लिए आवश्यक है।

पद कार्य नियुक्ति वर्ग
जिला कलेक्टर जिले का मुख्य प्रशासनिक अधिकारी राज्य सरकार (IAS) प्रशासनिक
एसपी/पुलिस अधीक्षक जिले का मुख्य पुलिस अधिकारी राज्य सरकार (IPS) पुलिस
सीईओ, जिला परिषद जिला परिषद के कार्यों का संचालन राज्य सरकार (IAS) प्रशासनिक
एसडीएम उपखंड का प्रशासनिक प्रमुख राज्य सरकार (RAS/IAS) प्रशासनिक
तहसीलदार तहसील का प्रशासनिक प्रमुख राज्य सरकार (RAS) राजस्व
बीडीओ ब्लॉक विकास अधिकारी राज्य सरकार (RAS) विकास
पटवारी ग्राम स्तर का राजस्व अधिकारी राज्य सरकार राजस्व

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Rajasthan History

राजस्थान सिविल सेवा

राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS)

राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) राज्य की प्रमुख सिविल सेवा है। RAS अधिकारी जिला और उपखंड स्तर पर महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर कार्यरत होते हैं। RAS की भर्ती Rajasthan Public Service Commission (RPSC) द्वारा आयोजित की जाती है।

RAS चयन प्रक्रिया

  • प्रारंभिक परीक्षा (Preliminary Exam)
  • मुख्य परीक्षा (Main Exam)
  • साक्षात्कार (Interview)
  • चयनित उम्मीदवारों का प्रशिक्षण
  • विभिन्न पदों पर नियुक्ति

RAS अधिकारियों के पद

  • अपर जिला कलेक्टर
  • उपखंड अधिकारी (SDM)
  • तहसीलदार
  • ब्लॉक विकास अधिकारी (BDO)
  • जिला स्तरीय विभागों के प्रमुख

राजस्थान पुलिस प्रशासन

पुलिस प्रशासनिक संरचना

राजस्थान पुलिस का प्रमुख Director General of Police (DGP) होता है। पुलिस प्रशासन जिलों में विभाजित है, प्रत्येक जिले का प्रमुख Superintendent of Police (SP) होता है। पुलिस प्रशासन की संरचना में Additional DGPs, IGs, DIGs, SPs, DSPs और Inspector शामिल हैं। राजस्थान पुलिस में कई विशिष्ट इकाइयाँ जैसे कि Special Task Force (STF), Anti-Terrorism Squad (ATS), और Traffic Police शामिल हैं।

पद स्तर उत्तरदायित्व नियुक्ति
DGP (महानिदेशक पुलिस) राज्य स्तर संपूर्ण राज्य की पुलिस व्यवस्था केंद्र सरकार
IG/ADGP (अतिरिक्त महानिदेशक) जोन स्तर कई जिलों की पुलिस व्यवस्था राज्य सरकार
DIG (उप महानिदेशक) रेंज स्तर कुछ जिलों की पुलिस व्यवस्था राज्य सरकार
SP (पुलिस अधीक्षक) जिला स्तर जिले की पुलिस व्यवस्था राज्य सरकार
DSP (उप पुलिस अधीक्षक) उपखंड स्तर उपखंड की पुलिस व्यवस्था राज्य सरकार
Inspector थाना स्तर थाने की पुलिस व्यवस्था राज्य सरकार

स्थानीय स्वशासन संस्थाएं

राजस्थान में स्थानीय स्वशासन संस्थाएं राज्य के विकास और जनता की भागीदारी सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इनमें पंचायती राज प्रणाली और नगर निकाय प्रमुख हैं। पंचायतें ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम स्तर पर प्रशासन और विकास योजनाओं को लागू करती हैं, जबकि नगर निकाय शहरी क्षेत्रों के लिए जिम्मेदार होते हैं। इन संस्थाओं के प्रमुख जैसे सदर सदस्य, अध्यक्ष और नगर पालिका अधिकारी स्थानीय प्रशासन के कामकाज को सुचारू बनाते हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे RPSC, VDO, Patwari में अक्सर स्थानीय स्वशासन की संरचना, कार्य और पंचायत अधिकारियों की जिम्मेदारियों से जुड़े प्रश्न पूछे जाते हैं। इसलिए इनके कार्य और संरचना का ज्ञान परीक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

ग्रामीण स्वशासन

  • ग्राम पंचायत - ग्राम स्तर
  • पंचायत समिति - ब्लॉक स्तर
  • जिला परिषद - जिला स्तर
  • सरपंच - ग्राम पंचायत प्रमुख
  • प्रधान - पंचायत समिति प्रमुख
  • जिला प्रमुख - जिला परिषद प्रमुख

शहरी स्वशासन

  • नगर निगम - बड़े शहर
  • नगर परिषद - छोटे शहर
  • नगर पालिका - कस्बे
  • मेयर - नगर निगम प्रमुख
  • अध्यक्ष - नगर परिषद/पालिका प्रमुख
  • मुख्य नगर अधिकारी - नगर निगम प्रशासनिक प्रमुख

स्थानीय स्वशासन के कार्य

सड़कों, पुलों और भवनों का निर्माण और रखरखाव

पेयजल और स्वच्छता व्यवस्था

स्ट्रीट लाइट और बिजली व्यवस्था

प्राथमिक शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं

पार्क और सार्वजनिक स्थलों का रखरखाव

Rajasthan Prashanik Vyavastha 2025 : Frequently Asked Questions

राजस्थान में जिला प्रशासन का प्रमुख कौन होता है?

राजस्थान में जिला प्रशासन का प्रमुख जिला कलेक्टर (District Collector/DM) होता है। कलेक्टर जिले में कानून-व्यवस्था बनाए रखने, विकास योजनाओं को लागू करने और सरकारी सेवाओं की निगरानी करने का कार्य करता है।

SDM और तहसीलदार में क्या अंतर है?

SDM या उपजिलाधिकारी तहसील स्तर पर प्रशासनिक और राजस्व कार्यों की देखरेख करता है, जबकि तहसीलदार मुख्य रूप से राजस्व संग्रह और भूमि रिकॉर्ड के लिए जिम्मेदार होता है।

स्थानीय स्वशासन संस्थाएं क्या हैं?

स्थानीय स्वशासन संस्थाएं राजस्थान में पंचायत और नगर निकाय जैसी संस्थाएं हैं, जो ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में प्रशासन और विकास कार्यों को लागू करती हैं।

महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)

1. राजस्थान में कुल कितने संभाग हैं?
(a) 5
(b) 6
(c) 7
(d) 8
2. जिले का मुख्य प्रशासनिक अधिकारी कौन होता है?
(a) एसपी
(b) जिला कलेक्टर
(c) जिला जज
(d) सीईओ
3. राजस्थान में कुल कितने जिले हैं?
(a) 48
(b) 41
(c) 52
(d) 55

उत्तर:

1. (c) 7

2. (b) जिला कलेक्टर

3. (b) 41